कोरी मटकी में दही जमे कोन्या।राधा बिना श्याम मिले कोन्या।
कान्हा मेरे एकबार तो आ जाइयो,मधुवन की कुंज गलिन में।
में तो पुरबियों पूरब देश रो मारी हेली ।
सखी वृंदावन का चोर मेरे घर में आया,
बहना बोलो ग्यारस के दिन राधे राधे,
तुम जो आए ना मोहन मुरारी। मर जायेगी ये राधा तुम्हारी।
मैं तो आई वृन्दावन धाम,
किशोरी तेरे चरनन में ।
राम करते रुदन निर भर के नयन, तीर मारा। हाय हाय मेरा लक्ष्मण प्यारा।
काऊ दिन पाले सुआ उड़ जायेंगे।
ओ कान्हा मेरे ओ कान्हा मेरे, तेरी राह निहारु पनघट पे,
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