हो भोले तेरे पर्वत पे कैसे छा रही छटा निराली है।
मुक्ति का कोई तूँ जतन करले रे,
रोज थोड़ा थोड़ा हरी का भजन करले ।
चलो साथीड़ा आपा हरिगुण गावा,
राधे राधे की कुंजी से,खुलेगा ताला श्याम का।
चल भोले के द्वार ठिकाना पाएगा,
छाई रै खाटू नगर में बहार,
श्याम मिलन की रूत आई,
तुझे किसने सजाया औ राधे। तूं दुल्हन सी लागे ओ राधे।
जब जब खाटू वाले के भगतो पे विपदा आई,
झूठी दुनिया से मन को हटाले
ध्यान मैया जी के चरणों में लगाले।
तूं भी श्याम रिझा ले, तूं भी भजनों को गा ले। तूं भी चरणों में शीश को झुकाले
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