चन्दन चौक पुरावा,
मंगल कलश सजावा,
आओ आओ ना बाबा जी,
म्हारे आंगणे,
Author: Pushpanjali
जय रघुनन्दन जय सियाराम,
हे दुखभंजन तुम्हे प्रणाम।।
म्हारी दादी जगत सेठाणी,
म्हारो मौज करे परिवार,
आजा आजा रे सांवरिया थारा,
टाबर बोले,
मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी,
राणा मारो या छोड़ो,
थारा खूब सजे शिंगार म्हारे सांवरिया सरकार,
माना में मजबूर हूं लेकिन,श्याम मेरा मजबूर नहीं।
मैं तो हु सांवरिया तेरे चरणों का पुजारी,
अब तिरछी नजर मेरे हरि की।
करना है तो कोई पुण्य करम कर ,
लेना है तो ज्ञान ले।
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