जा टूट भरम के ताले तू पूंजी ला गुरु ज्ञान की ।
Tag: bharam bhul me sowe
मैं नन्दलाल ना भुलाउंगी,
राणा मारो या छोड़ो,
मैं तो भूल गई भगवान माला भूल गई।
जब सर पे है राम का हाथ,चिंता फिर क्या करना।
भारत में फिर से आजा,मन मोहन मुरलिया वाले।
हार को अपनी भूल गया प्रभु,
जब से तेरा साथ मिला
क्यों भुल गए ए श्यामा,
मुझे पागल समझ कर भूल गए,
सिया राम लखन मेरे तीनों किस हाल में होंगे।
शबरी राम को बेर खिला रही,मीठे चाख चख के।
जय बजरंगी राम के संगी,
दीनन पर उपकार करो।
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