मैं हूँ शरण में तेरी संसार के रचैया,
खाटू वाले श्याम धणी,
तेरी अजब कहानी है,
ओ झुँझन वाली माँ,
क्या खेल रचाया है,
जिसकी नैया श्याम भरोसें,
डोल भले सकती है,
काया नगर रे बीच में रे,
लहरिया लम्बा पेड़ खजूर
दिनों का पालन हारा दुखियों का एक सहारा। मेरा श्याम है
नखरो छोड़ दे साँवरिया, थोड़ो सीधो हो जा रे नखरो छोड़ दे।
आधा है चंद्रमा रात आधी। रह न जाए मैया मुलाकात आधी मैया बात आधी।
डम डम डमरू बजाओ, कि भोले बाबा नाच के दिखाओ।
बंसी वाले से लागे दोई नैना। उन्ने मुश्किल करो मेरो जीना
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