काया तेरी माटी की हवेली।
छिपते छिपाते आ गई रे कान्हा तेरी नगरिया।
सुनो कान्हा कि ओ मैया, तेरा कान्हा सताता है,
नाम हरी का जप ले बन्दे, फिर पीछे पछतायेगा।
तुलसा मने राम ते मिला दे। राम ते मिला दे घनश्याम ते मिला दे
भोली भाली राधा चतुर गोपाल।
दोनों भक्तन के प्रतिपाल
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के काबिल नहीं है
कहाँ लगा तेरे तीर
अरे लक्ष्मण भैया
बता दो मेरे गुरुजी महातम एकादशी।
डम डम डमरू बजाए मेरा जोगी,
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