बहुत नाज करते है रहमत पें हम,
सलामत रहे तेरी नजरे करम,
राम नाम सुखदाई, भजन करो भाई
ये जीवन दो दिन का,
हँस हँस मीठो जग में बोलणो रे,
हंसला फेर मिलाला नाय।
कोई पीवो राम रस प्यासा, कोई पीवो राम रस प्यासा।
मात पिता से दगो जो करेगो,
चार जनम पछतावेगो,
जो भी आता है इस दर पे मिलता उसे जरुर है,
अरी री मैं तो ओढ़ चुनरिया जाउंगी मेले में,
जिसको नही है बोध,
तो गुरु ज्ञान क्या करे।
लागा रे बाण मारे शब्द गुरा रा,
घायल वे ज्यों री ए बातां,
मैं बरसाने की गली आ गई हूं,
राधे वृषभानु लली आ गई हूं,
You must be logged in to post a comment.