जब जब बाबा कोई ठोकर खाता है।रस्ता जब कोई नज़र नहीं आता है।
तेरी रुनझुन रुनझुन होय श्याम की बाज रही पायलिया।
टाबरिया अरदास करे रे,
मत ना टारो जी,
आन संभालो जी सावर,
आन संभालो जी
कन्हैया बागों में मत जाइयो बाग की मालन मोह लेगी।
लगन श्याम से यूं लगाया करें हम,
मजे दर्दे दिल के उठाया करें हम।
छोटी सी एक अर्जी मेरी,
छोटी सी दरकार है ।
आजा मेरे सांवरे,
तेरा इंतज़ार है ।।
जीवन संग्राम है, ना सुख आराम है, जब तक है खाटू वाला, डरने का क्या काम है।
सुन्दर भवन बना के,
मात मेरी बैठी आसन ला के।।
मन राधेश्याम सीताराम रट रे
तेरे संकट जाएंगे कट रे।
अब मन भज ले राधेश्याम,बुढ़ापा बैरी आवेगाे।
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