बृज रज में लौट लगाय लीज्यो,
तू जब वृन्दावन आए,
आना वीर हनुमान हमारे घर कीर्तन में।
तरेगा वही जिसके मन में हरी है, मन में हरी है,
गुरु जी तैने कैसो खेल रचायो
तेरी माया को पार ना पायो।
जमुना पे बैठो इंतज़ार करे, मेरो कन्हैया मोसे प्यार करे।
भटकता डोले काहे प्राणी, चला आ प्रभु की तू शरण में, बदल जाएगी जिंदगानी।
पीले फूलों की बगिया सुहानी, मेरी बगिया में आओ राधारानी।
मुझे अपनी शरण में ले लो राम, ले लो राम!
यही हसरतें तलब हैं, ये ही आरजू है दिल में,
मेरी नाव में चढ़ मत जाना,जादूगर दोनो भैया।
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