ऐसा देश दीवाना संतो,
ऐसा देश दीवाना,
हम पे है तेरा उपकार,
ओ बाबा हम तो पले है,
तेरी छाव में,
श्याम जी फागण आ रहया से,
तेरी गेल्या खेलां होली।
राम जपले रे सिया राम जपले,
आस लगी है, तेरे दर्शन की,लाज रखो मेरे असुवन की,
मै तो हवा हूँ किस तरह,
पहरे लगाओगे,
हो माने ना छेड़ो जी नंदलाल मटकियाँ सिर से गिर जायेगी।
मैं ढूंढ चूका जग सारा,
पता ना कहीं तेरा मिला,
बजरंगी की पूजा होती,
मंगल और शनिवार,
ये मेरी अर्जी है,
मै वैसी बन जाऊँ,
जो तेरी मर्जी
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