ऐलान करता हू, सरे आम करता हूँ,
मैं तो मेरे ही श्याम का, गुणगान करूँगा,
Author: Pushpanjali
आज कैलाश पर्वत आनंद भयो रे
पारवती के गजानन भयो रे।
कैलाश पर्वत पर जाकर रहूंगी।भोले को अपना बना के रहूंगी।
तुम्हारे दर पे आना चाहती हूँ
अगर हरी तू जरा सी आस देदे,
तेरे भजनों में मैं रम जावा। तेरे नाम यह दिल कर जावा।
तुम रूठ गए जो मुझसे क्या हाल हमारा होगा।
राम नाम की टिकट कटा लो
एक आती एक जाती है
कैसा सुंदर हिरन वनों में चरने आया है।
दयानिधि अब तो लो अवतार, मेरे प्रभु अब तो लो अवतार
हो जाओ तैयार साथियों,
हो जाओ तैयार,
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