तेरी सुन मुरली की तान ओ तान, मैं तो भूल गई सुध सांवरिया।
दस वे कन्हैया चोरी किथे किथे किती आ,
सूरज जब पलके खोले, मन नमह शिवाये बोले,
इस नभ में ऐसे चमके जैसे सूरज चांद सितारे।
हमें तो जोगनिया बनाए गयो रे ।
वो छलिया नन्द को री
बहुत कमाया राजा तेरे घर में।अब जाऊंगी सत्संग में।
कान्हा यो के आई थारा मन में,
गुजरया नचाई वृंदावन में।
राधा रानी हमारी पे रंग बरसे।
रंग बरसे रे गुलाल बरसे।
मनमोहन की प्यारी, राधा रानी हमारी।
सांवरियो रंग बरसाये, आयो आयो फागणियो।
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