रंग डाला सिंदूर से तन लाल है।
Author: Pushpanjali
इक चुटकी सिन्दूर माँग भरी जो, मिल जाते मैया को मेरे श्री राम,
पूजा करो हनूमान की, बोलो राम राम जी।
मेला मेला मेला,
मेरी शेरावाली का मेला,
मिठो जग में बोलणो हो रे हँसला फेर मिला ला नाय
दया दृष्टि करो सारे संकट हरो,
वीर बजरंगबली हनुमान
लंका चले हनुमान रे बोले जय श्री राम।
मैने मोहन को बुलाया है वो आता होगा,
उड़ चले रे हनुमान,
लिया राम जी का नाम,
जहां बिराजे शीश का दानी,मेरा लखदातार।चलो रे खाटू के दरबार।
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