म्हारी हुंडी स्वीकारो महाराज रे,
सांवरा गिरधारी,
Author: Pushpanjali
ओ मोहन तेरे हो गए हम,
प्यार में तेरे खो गए हम,
म्हारा रामापीर जी गेंद,
खेलण ने जावे,
तुझसे नज़रे मिली तो,
मैं दीवाना हो गया,
मझधार में कश्ती है,
और राह अनजानी है,
बाबा मेरा काम करोगे बोलो क्या लोगे,
राम से लगी डोरी श्याम से लगी। उनको कौन सतावे जिन की डोरी राम से लगी।
ही नहीं ऐसे खाटू में,
दीनो का मेला लगता है,
मैं तो भूल गई भगवान माला भूल गई।
बैठी थी घमंड में,में बैठी थी गुमान में।
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