देवी रो अगवाणी भैरूजी ,घुघरियाँ घमकावे ।
खाटू वाले श्याम धणी तेरा,
चर्चा हो गया से,
फूल है वो किस्मत वाले जो,
तेरे गले के हार में है,
मैं रोज निहारूँ झांकी,
खाटू वाले दातार की,
हे शिव भोले भंडारी,
मैं आया शरण तिहारी,
एक सवाल है इस प्रेमी का,
तू बता दे श्याम मुझसे,
प्रेम तुझको है के नहीं,
नीले घोड़े रा असवार,
म्हारा मेवाड़ी सरदार,
राणा सुणता ही जाजो जी,
राम नाम का सुमिरन करले,फेरे प्रेम की माला।
संगत करो नी निर्मल
साध री म्हारी हेली,
आवागमन मिट जाये,
लोक और परलोक सुधरग्या ,
करले काम भलाई को।
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