ना केले ना हलवा ना फ्रूटी चाहिए। मने हरी हरी भांग वाली बूटी चाहिए।
ऐसा सुंदर स्वभाव कहां पाया, राघवजी तुम्हें ऐसा किसने बनाया।
कभी आया साथी बनकर,
कभी आया माझी बनकर,
पिला दे सांवरिया,
अपने नाम की मस्ती,
दे दे श्याम धूल चरणन की,
सुन ले ओ बाबा,
चुंदड़ी मखमल की,मखमल की, उसके चारों पल्ले लाल।
खाटू वाले तेरी ज्योत जलती रहे,
सारी दुनिया को रोशन ये करती रहे,
चल री सजनी चल बरसाने
किरत ने लाली जाई है।
ओं मेरे कान्हा तेरा मुस्कुराना
भूल जाने के काबिल नहीं है।
मैंने हर पल ही पाया दया का हाथ तेरा
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