मारा मनवा जीवडलो हिलोरा खाय,
सुण म्हारा मनवा वीर ,
एड़ी नहीं करणी ।
छोड़ चला रे बंजारा,
गठडी छोड़ चला बंजारा।।
आज भवर में नैया कन्हैया
तुम हो कहा तुम हो कहाँ
हंसा नजर नहीं आया प्रेम गुरू,
अंत नजर नहीं आया,
तिरछी चितवन से करके इशारे,
चोट ऐसी जिगर पे ये मारे,
सखी री बांके बिहारी से
हमारी लड़ गयी अंखियाँ ।
क्यों नैणा भरमावे जी ,
थारे हाथ कबीरो नहीं आवे जी।
डम डम डमरू वाला बड़ा मतवाला, बड़ा भोला भाला है।
मैं मुरली पकड़ कर रोई कान्हा तेरी याद में
You must be logged in to post a comment.