ना ऐसा दरबार,और ना ऐसा सिंगार
Author: Pushpanjali
चालो खुशियां मनावां, झुमां नाचां और गावां
मेरी प्यारी नाराणी, बनेगी दुल्हनिया।
तूं बैठ पालकी नारायणी,तनधन जी के संग आज चली
दादीजी म्हारी अमर सुहागन जी
म्हाने चिंता है क्यांकी पड़ी,म्हारे पग पग पे दादी खड़ी।
गल मोत्यां को हार,सिर चुनड़ चमकदार
जद जद मां रोली घोलूं,मेरे मन में यो आवे
गिनती कोन्या देहली ऊपर, कितना सथीया रोज मंडे।
हठ पकड़े नंदलाला,मैया री मोहे चंदा ला दे।
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