आरती कुंज बिहारी की। श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
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रास रचायो रसिक बिहारी,एसो रस बरसाए दियो
कुञ्ज बिहारी से रास बिहारी से
मेरे नैना लड़ गये हाय रे मेरे नैना लड़ गये।
तिरछी चितवन से करके इशारे,
चोट ऐसी जिगर पे ये मारे,
हे गणपति तेरी आरती गाऊं। आरती गाऊं प्यारे आपको मनाऊं
जब तक नैना से नैना लगे ना, बांके बिहारी तब तक नोनो लगे ना
चलो साथीड़ा आपा हरिगुण गावा,
राधे जी के हृदय पटल पर वास तिहारो बिहारी।
ये कुञ्ज गली सँकरी सँकरी,
छुप गया कान्हाँ पकड़ी पकड़ी,
कान्हा मेरे एकबार तो आ जाइयो,मधुवन की कुंज गलिन में।
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