मोर मुकुट तेरे हाथों में बांसुरीया,
जिसने भी देखी तेरी सांवली सी सूरत। नैनों में हर पल रहती प्यारी सी मूरत।
मेरे उठे जिगर मे पीर कन्हैया तेरी याद में,
फागणियो नेड़े आयो सा,
ओ साँवरा,
म्हारे मन में हेत समायो सा,
ओ साँवरा।
सावन बिता कार्तिक बिता और बिता फागुन मास।
मोर छड़ी के झाड़े से बदल गए हालात
मेरी छोटी सी अर्ज़ी है
अब आगे तेरी मर्ज़ी
श्याम हे घनश्याम
लाखों महफ़िल जहाँ में युंतो
तेरी महफ़िल सी महफ़िल नही है
करुणामयी, कृपामयी,
मेरी दयामयी राधे।
झोपड़िया मेरी ऐसी छवायियो भगवान,
You must be logged in to post a comment.