चिट्ठी राम जी के नाम लिख दो।सारे भक्तों का प्रणाम लिख दो।
लट उलझी सुलझाय जा रे मोहन मेरे हाथ मेहंदी लगी।
कलयुग में डंका बजता है, दोनों देव महान है,
आज हमारे मन में अजब सी खुशियां है। करने बैठे कीर्तन सामने मैया है।
हे दशरथ नंदन दया करो, हम शरण तुम्हारी आए हैं
जब भी बुलाओ चली आऊंगी, गणपति तेरे भवन में।
कान्हा तुम मथुरा में बरसाने खड़ी,
कैसी बजाई बांसुरिया रे मोहन कैसी बजाई बांसुरिया।
ओ मेरी प्यारी मैया कहते हैं शिव त्रिपुरारी।
तू ही कन्हैया तू ही लखदातार है,
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