इतना सवर मत श्याम नजर तोहे लग जायेगी,
मोर छड़ी और नीले में जंग छिड़ी है भारी,
बालाजी भेरू जी माँ के चाले अगवाणी,
आ गया खाटू वाला वो आ गया खाटू वाला,
तुम्हे आज मोहन आना पड़ेगा,
झूला झूले हो गजानंद झुलना,
फागुन की रुत ऐसी आई है खाटू में मस्ती छाई है
छोटी छोटी सखियों में खेलती भवानी
कलयुग कठिन पाप रो पैरो,नियम छोड़ेला नर नारी
म्हारे हिवडे उठी हिलोर भायला खाटू नगरी जावण की,
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