आओ ए माजीसा म्हारे,
आंगने पधारो,
ये ज़िंदगी मिली है दिन चार के लिये,
मेरो छोटो सो बिहारी बडो प्यारो लगे,
दिल से दिल भर के न देखी, मूर्ति भगवान की।
तेरी बंशी पे जाऊं बलिहार, रसिया मैं तो नाचूंगी तेरे दरबार रसिया।
आव सखी देखा गणपत घूमे है,
लाम्बी है सूँड मतवाला जी,
जब रूठ गये शिव शम्भु जा कैलाश पे गाड़े तंबू
जाने क्या जादू भरा हुआ घनश्याम तुम्हारी गीता में।
बनवा दे भोले सोने की एक अटरिया,
यह कौन गुजरि आगी,आज म्हारे राधिका रास में।
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