थाने चुनरी महे टाबरिया उढाने आया
Author: Pushpanjali
बोल तने कईयां रिझाऊं मावड़ी।
महादेव चुनरिया ला दो ना।
कोई जब प्रेम से बुलावे,यो रुक नहीं पावे।
है रुणिचे रा धणिया अजमाल जी रा कंवरा
उमापती रखियो मेरी लाज
दूर नगरी बड़ी दूर नगरी
थारी चाकरी में चूक कोनी राखुं म्हारा सांवरिया,
गुरूजी मेरी काया की बन गई रेल। रेल बड़ी अजब निराली है।
इन्हीं आंखों में,इन्हीं आंखों में।
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