चली धरके मटुकिया दही वाली।
ओ बांके बिहारी मैं दिल गई हारी,
जब से मेरी हनुमान से,
पहचान हो गई,
कहे पांडव कृष्ण मुरारी जी,
अब रखीयो लाज हमारी,
मैंने बुलायो नहीं आयो कनवा।
हाथों लाल लाल चूड़ा मैया चमके, मैया आई है शेर पर चढ़के।
भादी अमावस आयी, भगतां मिल ज्योत जगायी,
मुरली वाले पे दुनिया दीवानी हो गई।
दर्शन रघुवर का करवा देना जय हनुमत वीरा।
पाके प्रेम वाली झांजर पैरी मैं वृन्दावन नचदी फिरा,
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