कान्हा तेरे रूप का तो दिया सा जले।दिया सा जले।गोवर्धन मैदान घाटी पहाड़ के तले।
दो शेरों का जोड़ा दरवाजे खड़ा रे। आय रही मैया भजन करो रे
पीपल की छांव में, ठंडी हवाओं में, बैठी है मेरी मैया, सबकी निगाहों में।
करेले की हो गई सगाई, चुकंदर नाचन को आई
बाबा हो बाबा,तेरे सिवा नहीं कोई हमारा।
पीहर न जाओ गौरा तेरा मेरा निरादर है।
मेरी बिगड़ी कौन बनाएं,
मेरा संकट कौन मिटाएं,
बाली उमरिया मोरी
कान्हा मोसे खेलो न होली
राधा की बाली उमरिया,कान्हा से लड़ गई नजरिया।
तूं मान कही नंदलाल नही,थाने में रपट लिखाय दूंगी।
You must be logged in to post a comment.