तीनों लोकों में गूँजा है जयकारा माँ का
तीनों लोक में मैया का जयकारा लगता है।
तुम्हें कैसे मनाऊं हनुमत में। आ जाओ तुम कीर्तन में।
काया ने सिंगार कोयलिया,
पर मंडली मत जइजो रे।
अगर श्यामा जु ना होती,
तो हम जैसो का क्या होता,
मंदिर है काली का पर्दा है जाली का, पर्दा हटा लो मेरी मां मैं दर्शन करने आई ।
मेरा लाख टके का झुनझुना,
में तो ल्याई कटरा से मोल, झनाझन बाजे झुनझुना,
मोहन तुम मथुरा में रहते हो रहते हो
मैं तो दौड़ी आयी जमुना के तीर कन्हैया तेरी बंसी बजी।
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी,
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