भजन कर मोहन मुरारी का, छोड़ मोह दुनियादारी का।
ओ भोले के पुत्र गजानन नाम है तुम्हारा,
मेरी छोड़ दे चुनरिया भोलेनाथ सवेरे बूटी लेकर आऊंगी
छुप छुप आयो श्याम लेके ग्वाल बाल हैं,
सोने चांदी के बनाये हनुमान दरवाजे लागे पीतल के।
गोद में गजानन मचल गयो रे चंदा खेलन मांगे कहां से लाऊं रे ।
कैसे बताऊं श्याम ने, क्या क्या नहीं किया
मैं बधाई देने को आई रे बना।
हे गणपति तेरी आरती गाऊं। आरती गाऊं प्यारे आपको मनाऊं
आ गए हो अगर श्याम इस मोड़ पर,
हमसे मिलने मिलाने का वादा करो
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