झुंझनु वाली दादी ये बुलावां थाने आज।
Category: रानीसती दादी भजन लीरिक्स
चौदस के दिन इन आंखों से, उड़ गई निंदिया रानी।
तेरी मेरी करता सारों जनम गवांयो।
तनधन बाबो सेठ,म्हारी नाराणि सेठानी है।
तनधन की पटरानी भजो रे मन नाराणी
आए सजधज के बाराती हैं
और रंग दे रे भाया, और रंग दे।
दादी थारो रूप मन भायो,जियो हर्सायो
चुनर तो ओढ म्हारी दादी सिंहासन बैठी जी
चुंदड़ी ओढ़ के राखिजे, मैया मन ना दिजे उतार।
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