मत ना जावो छोड़ काना,
याद घणैरी आवसी,
Author: Pushpanjali
आज म्हारे भोले बाबा,
भांग घणी पीदी ओ,
धुला लो पाँव राघव जी
अगर जो पार जाना है।
भोले बाबा ये क्या हो रहा है।पाप हंसता धर्म रो रहा है।
राम ने धनुवा तोड़ा जानकी तेरे लिए।
श्याम छलिया बन के आय गयो रे।
तूने इतना दिया बनवारी ओ बांके बिहारी,
मैं तो माला माल हो गया,
निगाहें फेर क्यों बैठे, मेरा तो और ना कोई,
थे ही जानो जी, हाथां में थारे या पतवार,
किरपा करो संकट हरो,
ओ सांवरे मेरी झोली भरो,
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