जिसको नही है बोध,
तो गुरु ज्ञान क्या करे।
जाग रे नर जाग दीवाना,
अब तो मूरख जाग रे ।
चार बहु ये मेरे आगी, वे बोले माजी माजी।
अरे कटे री लगाई इतनी देर जगदंबे।अर्जी पे अर्जी में करा जगदंबे मारी माय।
कान्हा कंकर ना मारो गगरिया में। हमें जाना है गोकुल नगरिया में
सब ग्वाल चिपट गए माखन में,मेरी धूल झोंक गयो आंखन में।
लड्डू गोपाल बसे हैं मेरे मन में।
सखी दोष नहीं मनमोहन का,
वह बांस बुरे जिनकी बंसी,
गुरु वचनो को रखना सँभाल के इक इक वचन में गहरा राज़ है,
श्याम चंदा चकोरी श्यामा प्यारी
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