मुकुट पर वारी, वारी बनवारी।
Author: Pushpanjali
उत्सव की बेला आई,
घर घर में बँटे बधाई,
यमुना किनारे मेरा गाँव, साँवरे आ जाना।
कन्हैया-कन्हैया पुकारा करेंगे,
लताओं में ब्रज की गुजारा करेंगे।
कदम तले आय जइयो, कटीले काजर वारी,
चले अइयो मोरे रसिया पलकन पे, चले अइयो।
आज ठाड़ो री बिहारी जमुना तट पे,
कैसो जादू डारो रे, अरे साँवरिया।
राधे मोय नथ को, किशोरी मोहे नथ को तोता बनाय दे,
मैं कैसे ब्याहूँ राधा, कन्हैया तेरो कारो,
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