पत्थर की मूरत को भगवान समझते हैं
जीवन में जब जब दुःख आए,
जब जब जी घबराता है,
जब छोड़ चलु इस दुनिया को,
होठों पे नाम तुम्हारा हो,
जब लाल तुम्हारा हूँ,
तो और कहाँ जाऊंगा,
गोरा ने गणपति जायो है गोरा ने,
मुँह फेर जिधर देखूं माँ तू ही नज़र आये,
दही खालो मटकिया ने फोड़ो,
गणपत जी ने सोहे,
दोय नारी जी गणपत ने।।
थोड़ो राम जी ने भज ले गेला,
थने सतगुरु देवे हैला।।
राम राम सा साधन ही, मुक्ति का द्वार है
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