थारी महिमा अपरंपार,
बाला आया तेरे द्वार,
अरजी सुणज्यो जीतपुरार, थे तो भूतों के सरदार,
बैठी पहाड़ों पे मैया,हो गया है देखो भोर
हे जीके राम नाम का खटका,
वो नहीं जगत में भटक्या।।
ऐसी चाय मालिक ले राखो ,
जनम मरण मिट जाई।
में तो हीरो गमादियो कचरा में ,पांच पचीसों का झगड़ा में।
आइए गणपति गजानन आइए। हमको सच्चा रास्ता बतलाइए।
जिनके होंठों पे मुरली,
रहे रात दिन,
रहे रात दिन,
बस वहीं मुरलीवाला,
हमें चाहिए
तेरे से ना छिपे है,
हालात ये हमारे,
तर जाओगे राम गुण गाने से, क्या होता है गंगा नहाने से।
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