कलयुग का राजा है,
खाटू का बाबा श्याम,
ठुमक ठुमक चली आये रही हो,
जगदम्बा हमारी,
एसो रास रचयो वृन्दावन,बज रही पायल की झंकार
प्रेम नगर मत जा ए मुसाफिर
प्रेम नगर मत जा।
आज्या नंद के दुलारे हो, रोवै अकेली मीरा।
सत्संग की महिमा मुबारक हो।
बाबा मतन्या लोग हंसावे रे,
हाथ जोडक़र करुं विनती, क्यों नहीं आवे रे।
बरसां सं यो दिन आयो,
हिवडै मं हेत सवायो,
ठाकुर पधारया म्हारै आंगणै,
लीलै घोडै वालो मेहरबान चाहिये,
साथ मांही वीर हनुमान चाहिये ।।
यूँ बजाओ ना मुरली की तान रे, तान ले लेगी जान रे ।
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