जानकी प्यारी के, जनक दुलारी के, मन में बसे हैं श्री राम
मेरी छोटी सी किशोरी,
बड़ी प्यारी लागे,
काली काली अमावस की रात में,
काली निकली काल भैरव के साथ में।।
कोई तिरछी नज़र से ना देखो के श्याम मेरा बडा सलोना है।
मेरी अलबेली सरकार मिला दो कान्हा से एक बार।
हमको भी एक बार घुमाई दे कोई अवध नगरिया।
जब टूट जाता हूँ,
गम के जमाने में,
जब टूट जाता हु अपनों के सताने से,
मेरों मन लाग्यो बरसाने में, जहाँ विराजे राधा रानी,
समय का पहिया चलता है।
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