झूठी काया में डोले,
झूठी माया में डोले,
म्हारा सांवरिया री मुरली मीठी घणी।
जीवन का भरोसा नही कब मौत आ जायेगी
कछु राई घटे और ,
तिल नहीं बढ़ने का।
तुम राम कहो या श्याम कहो दोनों ही जग में सुंदर है।
भोले तेरी आई याद कि भोले आ जाना।
सुमिरण दुख भंजन का,
चारभुजा धारी गिरजा नंदन का,
जिस दिन भोले बाबा का बुलावा आएगा। बैठ के मुंडे रे कागा बोल जाएगा।
मस्त महीना फागण का,
खुशियों का आलम छाया,
आज गुरु आविया रे,
मारा हिवड़ा में उठी रे हिलोर।।
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