भोले के गले में काला नाग डोले,
झूला तो झूले रानी राधिका,
झुलावे नंदकुमार,
मुकुट सिर स्वर्ण का,
मेरे गजानंद का,
माँ गौरा के ये लाल है,
राधे राधे गोविन्द गोविन्द बोल,
केशव माधव हरी हरी बोल,
ओढ़ चुनरियाँ मैया लाल चली,
सिंघ सवारी पे है लगती भली।।
म्हारी मावड़ली को आयो है सन्देश,
ले चालो म्हाने पिहरिये,
नवरातों के दिन आए है,
मैया रानी आएगी,
कितना सोणा है दरबार,
भवानी तेरा ये सिणगार,
हो मेरे बालाजी भगवान, तेरा भगत पुकारे आईए।
तूं बणया दूज का चांद बाबा नजर कदै ना लागे।
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