गल मोत्यां को हार,
सिर चुनड़ चमक धार,
देकर सोलाहा शृंगार,
माँ बनडी सी लागो जी
रो रोकर फरियाद करा हां श्याम मिजाजी आजा रे।
आंख्या को काजल थारो, होठां री लाली जी,
लो आ गया है फागुन निशान उठा लेंगे ,
ओ साँवरिया आँख्यां खोल,
तेरा सेवक अरज़ गुजारै ।।
ये सुन्दर सिणगार सुहाना लगता है,
ओ मेरी प्यारी दादी,
देख तेरी बेटी आई,
डारो नहीं डारो, रंग रसिया श्याम ।
हेलो म्हारो साम्भळो, रूणीचे रा नाथ।
नोमी मंगसिर की आई,
परणीजे लाडो बाई,
तनधन पधार्या म्हारे आँगणे,
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