गल मोत्यां को हार,
सिर चुनड़ चमक धार,
देकर सोलाहा शृंगार,
माँ बनडी सी लागो जी
Author: Pushpanjali
रो रोकर फरियाद करा हां श्याम मिजाजी आजा रे।
आंख्या को काजल थारो, होठां री लाली जी,
लो आ गया है फागुन निशान उठा लेंगे ,
ओ साँवरिया आँख्यां खोल,
तेरा सेवक अरज़ गुजारै ।।
ये सुन्दर सिणगार सुहाना लगता है,
ओ मेरी प्यारी दादी,
देख तेरी बेटी आई,
डारो नहीं डारो, रंग रसिया श्याम ।
हेलो म्हारो साम्भळो, रूणीचे रा नाथ।
नोमी मंगसिर की आई,
परणीजे लाडो बाई,
तनधन पधार्या म्हारे आँगणे,
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