सुंदर सखी दो कुमार, कुमार मैंने देखे।
ना झटको शीश से गंगा हमारी गौरा भीग जाएगी
भोले मेरी नैया को, भव पार लगा देना
साँसों का क्या भरोसा, रुक जाए चलते चलते
सत्संग में हरि को नाम हमारो मन सत्संग में
मेरी तुलसा घेर घुमेर प्यारी लागे अंगना में
मोहन से दिल क्यूँ लगाया है,ये मैं जानू या वो जाने,
ना पैसा लगता है, ना खर्चा लगता है, जय श्री श्याम बोलिए, बड़ा अच्छा लगता है
मेरी तुलसा घेर घुमेर प्यारी लागे अंगना में
मेरी लाज गई तुम बचाओ हरी जी
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