अमूवा की डाली हिंडो घाल्यों, जे कोई झूलन आय
एकदिन में खरीद लाई,छोटी सी लटाई
शंकर जी है भोले भाले, जटा के बाल काले,गले में नाग डाले है।
मेरी तुलसा घनी गुणवान मैं वारी जाऊं तुलसा पे।
धरती से गगन तक ढूंढा रे मेरा श्याम न जाने किधर गया।
तुमसे मिलने को ऐ मुरली वाले,
दिल के अरमान मचलने लगे हैं,
मुझे दर्शन दे गई माँ , कल रात सोते सोते
जिसकी लागी रे लगन भगवान में,
उसका दिया रे जलेगा तूफान में।
बड़े जन्मों के बाद चोला पाया, नी देखी कित्ते दाग ना लगे।
पुड़िया ज्ञान की पिलादे गुरुदेव दर्द मेरी नस-नस में,
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