तेरे दर का बनू सेवादार,
हे गजानन दो चरणों का प्यार।
भोले जी तनक सो काम हमारो मानु एहसान तुम्हारो
अब मैं रात नींद ना सोयी
रे कान्हा तेरी याद में।
ठाकुर जी तेरी सेवा हमसे ना बनी रे
राम नाम की नैया लेकर सद्गुरु करें पुकार,
रास रच्यो है
यमुना के तट हरी
रास रच्यो है
तेरा ही दिंया जीवन,
तुझपे ही लुटाना है।
जगदम्बे मेहरोंवाली, भवानी शेरोंवाली,
आई हूं, आई हूं, आई हूं तेरे द्वार,
आइये रे अंजनी के जाए,
अरे क्युकर लागया फेरा रे।।
मारा सांवरिया सिरमोर ,
थारा बंद दरवाजा खोल।
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