देखो वृन्दावन की कुंज गलिन में, नाचत नन्द्कुमार।
श्यामा श्याम सलौनी सूरत का सिंगार बसन्तीहै।
चौरासी की नींद में, म्हारां सतगुरु आके जगा रे दिया,
मंदिरियो लागे बाबा प्यारो जहाँ में थारो रुतबो है न्यारो
पंछी लेजा तू सन्देश म्हारे श्याम धणी के देस,
करमा बाई अरज गुजारे,
बेटी जाट री अरज गुजारे,
मैं तो तेरी हो गई श्याम,
दुनिया क्या जाने,
राधा के मन में बस गए श्याम बिहारी।
क्या देखे ,
मुझे दिल की बिमारी है।
तूं मन से बुला के देख,मैया आएगी
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