चलो बना जी शहर मेरा दिल गांव में नहीं लगता है।
हरि ओम हरि ओम बोल रे तोते। हरि के भजन में तू मार ले गोते।
चांद सा सलोना मुख
लटें घुंघरारी है।
लेना खबर हमारी हरिदास के बिहारी ।
सेठा में सेठ है न्यारो,
यो मुरली बजाबा वारो,
झीनरो परमार्थ मारे,
जूनो जोशी जाने।
मिन्दर री खिड़की वेगी खोल जोशी,अजमल आयो है दर्शन करवा ने ओ जी,
भटक भटक कर सारे जग में,
आया द्वार पे तेरे,
ये मोरछड़ी लहरा दो,मेरे सारे कष्ट मिटा दो,
सुरता रंग महल चाल ,
फुलड़ा री सेज बिछी।
You must be logged in to post a comment.