रामदेव म्हारा पालनीये झूले रे,
सिया राम जी का डंका लंका में,
बजवा दिया बजरंग बाला ने।
मेरे दिन बंधू भगवान रे,
गरुड़ पर चढ़कर आ जाना।।
रंगा लाई रे सतगुरु से ज्ञान चुनरी।
रे भज मन राम नाम अति प्यारा,
मेरी आँखों में आंसू को तू आने ही नहीं देता,
एसो कोई नहीं रे, हीरा को परखैया राम कोई नहीं रे।
फागुन के रंग उड़े पुरवा के संग चले,
चुनर के संग उड़े साड़ी रे,
तेरी माया का ना पाया कोई पार,
की लीला तेरी तु ही जाने॥
ना जाने कौन से गुण पर,
दयानिधि रीझ जाते हैं ।
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