कन्हैया लाल घड़लो म्हारो,भर दे रे।
Author: Pushpanjali
जो रावण ने सीता चुराई न होती
लहर लहर लहराए रे,झंडा बजरंग बली का।
झूला में बैठ्यों आज म्हारो, श्याम ललो।
बड़े प्यार से मिलना सब से, दुनियां में इंसान रे।
गोविंद मेरी यही प्रार्थना है,भूलूं कभी ना में नाम तेरा।
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय
इठलाती हुई बलखाती हुई,चली पनियां भरण शिव नार रे
भोले मेरी कुटिया में धीरे धीरे आना
जादू भरी है बनवारी,श्याम मुरली तुम्हारी।
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