कान्हा कान्हा करती राधा घूम रही बरसाने में।
दादी मंगलम दादी नाम मंगलम
मंगल पाठ दादी का जो रोज करोगे,
आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ,
अरे चेत रे नर चेत रे
थारो चिड़िया चुग गयी खेत रे
तू बस गयो कितनी दूर याद तेरी आवे रे सांवरिया
कान्हा मथुरा में बहना वैद्य बनो सरकारी।
मिल जाएं कृष्ण मुरार रे सखी ग्यारस कर लो।
पत रखियो गोरी के लाल,
लाज रखियो गोरी के लाल,
गौरा ढूंढ रही पर्वत पर,
शिव को पति बनाने को,
You must be logged in to post a comment.