हरी नाम सुमर बन्दे हर दुःख टल जाएगा,
कभी फुर्सत तो मैया आ जाओ
रुखा सूखा भोग लगा जाओ।
सिंह पे सवार होके आई मेरी मैया,रथ पे सवार होके आई है
द्वारका में रखा सुदामा ने पहला कदम
बाबा तुमसा दयालु,
देव दुजा नहीं है,
Shiv ji ki aayi hai barat,kah do mata rani se,
नदियाँ रो नीर सांवरा ,
रोक ने बतावो।
म्हारे नैणा माँहिलो नीर ,
रुकेला कोनी रे।
जीवन तो भैया एक रेल है,
कभी पेसेंजर कभी मैल है,
बीती आधी रात हनुमान भी ना आए,
चिठ्ठी लिख दी किशोरी जी के नाम,
बूला लो मुझे बरसाना,
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