छीन लिया मेरा भोला सा मन मेरो राधारमण मेरो राधारमण।
फूल कमलों से निकले गणेश ललना,
मेरा जीवन धन हनुमान शरणों थारो लियो।
म्हारा घडी रे घडी रा रिछपाल सिमरु बाबा बजरंग ने।
ऐसा बना दे मुझे श्याम दीवाना,
बन के दीवाना गाऊं प्रेम तराना,
जिनके नाम के सुमिरन से ही बन जाता हर काम,
मैं के बोलूं बालाजी,
तने सब बातां का बेरा से,
मन बस गयो नन्द किशोर,
अब जाना नहीं कही और,
भक्ति कर लेना ईश्वर की बंदे हंस हंस के,
जल बरसे बिजुरिया चमके, चमके मोरे राम॥
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